महामृत्युंजय यंत्र प्राणप्रतिष्ठाति/Activated/Energized भोजपत्र
श्री यंत्र – तांत्रिक शक्ति और लक्ष्मी का प्रतीक
श्री यंत्र एक ज्यामितीय चित्र है, जो मुख्य रूप से भारतीय धर्मों की तांत्रिक परंपराओं से लिया गया है। यह यंत्र मंदिरों या घर में देवताओं की पूजा के लिए, ध्यान में सहायता के रूप में, और हिंदू ज्योतिष एवं तांत्रिक ग्रंथों के आधार पर इसकी गुप्त शक्तियों द्वारा दिए गए लाभों के लिए उपयोग किया जाता है।
श्री यंत्र को मां लक्ष्मी का सूचक माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में प्रतिदिन श्री यंत्र की पूजा-अर्चना होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास रहता है और घर में संपन्नता बनी रहती है। इसके अलावा, श्री यंत्र की स्थापना से कारोबार में सफलता, समृद्धि, आर्थिक मजबूती और पारिवारिक सुख प्राप्त होते हैं।
श्री यंत्र की शक्ति और महत्व
श्री यंत्र सबसे शक्तिशाली यंत्र है। यह पवित्र यंत्र एक प्राचीन उपकरण है जिसमें लौकिक शक्तियां हैं जो उपासकों को विकसित होने में मदद करती हैं। इसे 'कॉस्मोग्राम' कहा जाता है – जो उत्सर्जन और पुनः अवशोषण की सार्वभौमिक प्रक्रियाओं का एक ग्राफिक प्रतिनिधित्व करता है।
दैनिक पूजा और मंत्र साधना
दैनिक अभ्यास के दौरान, निम्नलिखित मंत्रों में से एक का उच्चारण करते हुए श्री यंत्र पर ऊपर से नीचे तक नौ बार सिन्दूर या कुमकुम लगाना चाहिए:
• ओम श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः।
• ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नमः।
• ॐ श्रीं ॐ नमो देव्ये उज्जवल हस्तिकाये।
इस साधना से श्री यंत्र के द्वारा घर में लक्ष्मी का वास, संपन्नता और समृद्धि सुनिश्चित होती है।
हमारे यहाँ के श्री यंत्र भोजपत्र पर निर्मित होते हैं और अक्षय तृतीया के दिन विधिपूर्वक पंडित जी द्वारा प्राणप्रतिष्ठाति/Activated/Energized किए जाते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि यंत्र के सभी लाभ पूर्ण रूप से प्राप्त हों।
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